Friday, April 23, 2010

रामभरोसे का डाईरिया


रामभरोसे का डाईरिया 
                 अतुल मिश्र 

    बीमार होने के बाद रामभरोसे के मन में बिना किसी नैसर्गिक क्रिया के इस ख़्वाहिश ने जन्म ले लिया कि लोगों को उनकी इस बीमारी के बारे में कुछ इस तरह से पता चले कि वे अपनी सम्वेदनायें व्यक्त करने लगें. बिस्तर पर पड़े हुए वे घंटों से इसी बात पर अपना चिंतन कर रहे थे कि अगर उनकी बीमारी के बारे लोगों को पता ही नहीं चला तो लानत है ऐसी बीमारी पर. कई बार उन्होंने अपनी कर्कशा लगने वाली बीवी से भी आहिस्ता से पूछ लिया कि किसी का फोन तो नहीं आया था ? इसके अलावा यह हिदायत भी विनम्रतापूर्वक उन्होंने दे रखी थी कि अगर कोई मुझे पूछे तो बता देना कि बीमार चल रहे हैं आजकल. बीवी ने कुछ इस अंदाज़ में सिर हिलाकर उनको तसल्ली दी कि अगर याद रहा तो बीमारी भी बता दूंगी कि रात में उठकर चोरी से मिठाई खाने की वजह से दस्त लगे हैं. 
    कई बार जब बीमार आदमी से कोई उसका हाल ना पूछकर घड़ी का टाइम पूछने आता है तो उसे जो कष्ट होता होगा, उसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल होता है कि किस किस्म का होता होगा ? रामभरोसे को दो दिन से दस्त लगे थे और जो तमाम देशी इलाज़ के बावज़ूद जब थमने में नहीं आये तो यह कन्फर्म हो गया था कि मामला अब गंभीर हो गया है और अगर खर्चा किये बिना डॉक्टर को नहीं दिखाया तो पता नहीं वह कैसी  शक्ल अख्तियार कर ले ? राम भरोसे को पूरी उम्मीद थी कि कई महीने का बकाया किराया लेने वाला उनका मकान-मालिक तो ज़रूर ही उनके घर आएगा और तब वे उसे कराहते हुए कहेंगे कि ऐसे हालात में यह कोई बात है करने लायक ? देख नहीं रहे हैं कि क्या हालात हैं हमारे ? ना कुछ खाने के, ना कुछ पीने के रहे. उस पर किराए की बात करने से टेंशन हो गयी तो हालत और भी खराब हो सकती है और जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी आपकी ही होगी.
    " क्या हो गया ? सुना है हालत ज़्यादा खराब है ? " कोई दोस्त राम भरोसे को फोन करके कन्फर्म करता है.
    " हां, यार, कई दिन से ऐसी ही हालत चल रही है. डॉक्टर कहता है कि डाईरिया हो गया है. " बीमारी अगर अंग्रेजी में ही बताई जाये तो उसकी महत्ता बढ़ जाती है. वरना हिंदी में अगर दस्त होने की बात कह दी जाये तो लोग ऐसे मुंह बना लेते हैं, जैसे इस बीमारी की कोई कद्र ही ना हो.
    " यह कहो ना कि दस्त हो गए हैं. डाईरिया तो बहुत ऊंची बीमारी है, वह तुम्हें नहीं हो सकती. अंग्रेजों की बीमारी है और उन्हीं को होती है. " रामभरोसे की बीमारी को ख़ास तवज़्ज़ो ना देकर दोस्त फोन रख देता है.
    " कमबख्त को बीमारी से भी जलन होने लगी. सारी अच्छी बीमारियां जैसे उसी के भाग्य में ही हैं, हम तो जैसे अंग्रेजों वाली बीमारी मोल ले ही नहीं सकते. " राम भरोसे का पारा आसमान पर इसलिए नहीं जा पाया कि अगर वह आसमान पर चला जाता तो उनका डाईरिया चारपाई पर बिखरा दिखाई देता.
    सुबह ही सुबह कई दिनों बाद जमादारनी आई तो उसने पूछ लिया कि " बाबूजी के दस्त अब काबू में हैं कि नहीं ? " रामभरोसे ने बिना बीवी के जवाब का इंतज़ार किये ही चारपाई से लगभग उठते हुए जवाब दिया " हां, अब काफी राहत है पहले से, चंपा. " चंपा समझ गयी कि उसे देखकर सदा मुस्कराने वाले एक और शख्स  की कमी जल्दी ही पूरी हो जायेगी. रामभरोसे ने चारपाई से उठने का एक असफल प्रयास किया तो उनकी कर्कशा लगने वाली बीवी ने फ़ौरन उन्हें लिटा दिया. रामभरोसे ने लाख कहा कि वे अब बिलकुल सही हैं और चल-फिर सकते हैं, मगर बीवी ने नहीं उठने दिया. चंपा की एक मुस्कान ने उनका डाईरिया लगभग ठीक कर दिया था. वे बहुत देर तक इस बात पर विचार करते रहे कि अगर ऐसी ही मुस्कानें  लोगों की बीवियों की भी लगने लगें तो कोई भी बीमारी आसानी से किसी को अपनी गिरफ़्त में नहीं ले सकती.