Saturday, April 10, 2010

बोलो क्या करें ?



            अतुल मिश्र 

तुम नहीं हो अब हमारे पास, बोलो क्या करें ?
जा रहा है पास से मधुमास, बोलो क्या करें ?

यह पता है कि नहीं मिल पायेंगे इस दौर में,
है जुदाई का गहन अहसास, बोलो क्या करें ?

तुम मनाने के लिए, रूठे रहे कुछ जानकर,
पर हमें बिलकुल नहीं अभ्यास, बोलो क्या करें ?

हम किसी सागर को जितना पी सके थे, पी चुके,
और ज़्यादा बढ गयी है प्यास, बोलो क्या करें ?

हम हलाहल पी चुके हैं, व्यंग्य के, उपहास के.
ज़िन्दगी में हैं विरोधाभास, बोलो क्या करें ?

रात में गहरा अकेलापन, उदासी, व्यग्रता,
बस, यही हैं दोस्त अपने ख़ास, बोलो क्या करें ?

जब जनाजा जा रहा होगा, हमारा, आओगी,
है हमें इतना अधिक विश्वास, बोलो क्या करें ?

1 comment:

Kamlesh Kumar Diwan said...

bolo kiya kare ,achchi rachna hai.