Thursday, December 24, 2009




हर ग़म में मुस्काना सीख,
खुद को यूं बहलाना सीख,

बाधाएं खुद हट जायेंगी,
पर्वत से टकराना सीख !

चट्टानें बेजान पड़ी हैं,
हिम जैसा गल जाना सीख !

सागर में मिलने से पहले,
एक नदी बन जाना सीख !

मौत कभी भी आ सकती है,
मन को यह समझाना सीख !

अपनी हुनर भरी ख़ुशबू से,
शब्दों को नहलाना सीख !

'अतुल' जहां आदर्श खड़े हों,
अतुल मिश्र कहलाना सीख !
-अतुल मिश्र


2 comments:

प्रबल प्रताप सिंह् said...

सागर में मिलने से पहले,
एक नदी बन जाना सीख !

मौत कभी भी आ सकती है,
मन को यह समझाना सीख !

अपनी हुनर भरी ख़ुशबू से,
शब्दों को नहलाना सीख !
bahut sundar or yatharth varnan...!!

VIJAY ARORA said...

VERY INSPIRING WORDS